सीएम योगी का ये कहना कितना सही कि आगरा को शिवाजी के नाम से जानते हैं,शिवा जी का यहां से क्या रिश्ता

27 Mar, 2025
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लखनऊ। विश्व आगरा को मुगल साम्राज्य के केंद्र के तौर पर जानता है,जहां ताजमहल से लेकर तमाम मुगलिया दौर की इमारतें और पहचान हैं।हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में आगरा में एक संबोधन में कहा कि आगरा को लोग आमतौर पर शिवाजी के नाम से जानते हैं,क्या ये बात वाकई सही है,आखिर शिवाजी का आगरा से कोई रिश्ता है। इसके साथ ये भी जानेंगे कि आगरा का रिश्ता मुगलों से क्यों कहा जाता है,मुगलों से पहले आगरा किसका था।

सीएम का ये कहना कुछ हद तक सही

सीएम योगी का ये कहना कुछ हद तक सही है।छत्रपति शिवाजी का संबंध आगरा से रहा है।ये रिश्ता लगभग तीन महीने का था,जब औरंगजेब ने शिवाजी को आगरा धोखे से बुलाकर नजरबंद कर दिया था।इसके बाद शिवाजी योजना बनाकर निकलने में सफल रहे।ये कहानी बहुत सुनी और पढ़ी जाती है।

औरंगजेब ने शिवाजी को बुलाया आगरा

औरंगजेब ने 1666 में अपने 50वें जन्मदिन पर छत्रपति शिवाजी को आगरा में अपने दरबार में बुलाया। औरंगजेब के जन्मदिन के मौके पर दरबार में एक समारोह हो रहा था।हालांकि औरंगजेब ने इस समारोह के जरिए शिवाजी को एक साजिश के तहत ही बुलाया था।

औरंगजेब का मकसद कुछ और ही था

औरंगजेब शिवाजी को ना केवल अपने अधीन करना चाहता था बल्कि कमजोर भी करना चाहता था।जब शिवाजी आगरा पहुंचे तो उन्हें वह सम्मान नहीं दिया गया।दरबार में भी जब शिवाजी गए तो उन्हें अपमानित महसूस हुआ।औरंगजेब ने शिवाजी को आमंत्रित जरूर किया,लेकिन दरअसल उसका मकसद कुछ और ही था।

शिवाजी को कर दिया गया नजरबंद

औरंगजेब ने शिवाजी को नजरबंद कर दिया। शिवाजी को आगरा के जयपुर भवन (अब इस नाम का कोई भवन आगरा में नहीं) में रखा गया,जो आगरा में एक खास जगह थी।ये भवन जयपुर के राजा द्वारा बनवाया गया था।मुगल दरबार के अधीन हो चुका था।शिवाजी को उनके पुत्र संभाजी और कुछ विश्वासपात्र साथियों के साथ वहां रखा गया।शिवाजी वहां लगभग तीन महीने रहे।

तीन महीने चली नजरबंदी

शिवाजी 12 मई 1666 को आगरा पहुंचे थे।शिवाजी की नजरबंदी मई से 17 अगस्त 1666 में तब तक चली जब तक कि शिवाजी अपने बेटे संभाजी और कुछ साथियों के साथ आगरा से भागने में सफलता नहीं हो गए।ठोस अनुमान के मुताबिक शिवाजी को आगरा में लगभग 90 से 100 दिनों तक नजरबंद रखा गया।

नजरबंदी के दौरान औरंगजेब के विश्वस्त अधिकारी और सैनिक शिवाजी की दिन-रात करते थे निगरानी

निगरानी के लिए सैनिक और अधिकारी मुस्तैद किए गए। शिवाजी की सेवा और निगरानी के लिए औरंगजेब ने विश्वस्त अधिकारियों और सैनिकों को जयपुर भवन के आसपास नियुक्त किया।नजरबंदी की निगरानी की जिम्मेदारी फुलाद खान नामक एक मुगल अधिकारी को दी गई।फुलाद खान आगरा किले का कोतवाल था और औरंगजेब का भरोसेमंद माना जाता था।इसके अलावा कुछ सशस्त्र पहरेदार और मुगल सैनिक भी निगरानी के लिए तैनात किए गए ताकि नजरबंदी में शिवाजी की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, ताकि वहां से निकल नहीं पाएं।

मिठाई के टोकरे में बैठकर शिवाजी बच निकले

शिवाजी ने अपनी चतुराई से इस निगरानी को धता बताते हुए मिठाई के टोकरों में छिपकर भागने की योजना बनाई।इस दौरान शिवाजी के साथ उनके कुछ विश्वासपात्र माधव राव और अन्य लोग मदद कर रहे थे।ये काम शिवाजी ने इतनी सफलता के साथ किया कि टोकरी में छिपकर पहले जयपुर भवन से निकले और फिर आगरा से भी।

यही है शिवाजी का आगरा से रिश्ता

यह घटना इतिहास में शिवाजी की बुद्धिमत्ता और साहस के एक उदाहरण के रूप में प्रसिद्ध है।प्रत्यक्ष तौर पर इतिहास में शिवाजी का आगरा से यही रिश्ता लिखा गया है।अप्रत्यक्ष तौर पर ये कह सकते हैं कि आगरा मुगलों की राजधानी या केंद्र होने के कारण हमेशा शिवाजी के अभियानों के निशाने पर रहा। शिवाजी का मुगलों के साथ लगातार संघर्ष चलता रहता था।इसका असर आगरा पर पड़ता ही रहा होगा।

क्या कहता है इतिहास

हालांकि शिवाजी के अभियानों का मुख्य केंद्र दक्कन और पश्चिमी भारत (महाराष्ट्र, कर्नाटक, आदि) रहा, ना कि आगरा पर सीधा हमला।आगरा से भागने के बाद शिवाजी की यह कहानी मराठा इतिहास में बहुत प्रसिद्ध हुई।इस तरह आगरा शिवाजी की वीरता की कथा का हिस्सा बन गया।इसके अलावा कोई अन्य ठोस और प्रत्यक्ष संबंध शिवाजी और आगरा के बीच इतिहास में कहीं भी है।

जयपुर हाउस अब आगरा में किस हाल में

इतिहास कहता है कि आगरा में जयपुर भवन (इस भवन को हाल में इस नाम से उल्लेख किया गया) नाम से कोई प्रसिद्ध या आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त इमारत का स्पष्ट उल्लेख ऐतिहासिक स्रोतों में नहीं मिलता।हो सकता है शिवाजी को नजरबंद रखा गया था, लिहाजा इस वजह से उस भवन को जयपुर भवन नाम दिया गया हो,क्योंकि आगरा में जिस भवन में शिवाजी को रखा गया था वो जयपुर के राजा (मिर्जा राजा जय सिंह) से संबंधित था,जिन्होंने औरंगजेब के दौर में शिवाजी को आगरा बुलाने में भूमिका निभाई थी।इतिहासकार ये भी मानते हैं कि जिस भवन में शिवाजी रहे होंगे,हो सकता है कि वो जयपुर के राजा की संपत्ति या उनके प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा रहा होगा।इस भवन की सटीक पहचान और वर्तमान स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी सीमित है। आगरा में जयपुर भवन नामक कोई विशिष्ट संरचना आज के समय में प्रसिद्ध नहीं है।शायद वो भवन समय के साथ नष्ट हो गया हो।

आगरा में कौन सी इमारतें अभी फेमस

आज आगरा में मुख्य रूप से ताजमहल,आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे यूनेस्को स्थल ही प्रसिद्ध हैं,हालांकि आगरा में कई मुगलकालीन इमारतें समय के साथ लुप्त हो गईं।केवल वो ही बचीं,जिन्हें पुरातत्व विभाग ने संरक्षित किया

इन सभी बातों का ऐतिहासिक स्रोत क्या है

जाने माने इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने शिवाजी और उनका समय (Shivaji and His Times) किताब लिखी, जो शिवाजी के जीवन और उनकी आगरा यात्रा के बारे में विस्तार से बताती है।इसमें नजरबंदी के स्थान का उल्लेख है, हालांकि जयपुर भवन नाम स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है।इसे संभवतः जयपुर के राजा जय सिंह से जुड़ा हुआ माना जाता है।

क्या कहता है मराठा इतिहास

मराठा और मुगल इतिहास के दस्तावेजों में आगरा में शिवाजी की नजरबंदी का जिक्र है,लेकिन विशिष्ट भवन की मौजूदा स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं है।आगरा के मुगलकालीन स्थानों पर लिखे गए ग्रंथों में जयपुर भवन का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।अनुमान लगाया जाता है कि यह या तो नष्ट हो गया या इसका नाम बदल गया।

अब की स्थिति

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ASI की आधिकारिक वेबसाइट और आगरा के संरक्षित स्मारकों की सूची में जयपुर भवन का कोई उल्लेख नहीं है।

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