भारत को कैसे मिली आजादी, जानिए स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

15 Aug, 2021
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देश 15 अगस्त पर अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस ( Independence day ) मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को हमें ब्रिटिश शासन के 200 सालों के राज से आजादी मिली थी। यह दिन हमें महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद समेत सैंकड़ों महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान की याद दिलाता है। हर वर्ष आजादी की सालगिरह पर स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों आदि में कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है जहां देशभक्ति के गीत बजाए जाते हैं.  इस पृथ्वी पर जन्मा प्रत्येक जीव को स्वतंत्रता का अधिकार है एवं प्रत्येक जीव स्वतंत्र रहना भी चाहता है | पराधीनता के जीवन से मृत्यु अच्छी है | मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई “पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं” यह प्रमाणित करती है कि पराधीनता में रहकर मोहनभोग भी खाने को मिल जाय तो वह तृप्ति नहीं मिल पाती जो संतुष्टि स्वतंत्रता की सूखी रोटी में प्राप्त होती है | हमारा देश भारत कई वर्षों तक पराधीन रहा | धीरे – धीरे दमनकारी नीतियों के विरुद्ध चिन्गारी भड़कने लगी और उसे हवा दिया हमारे देश के अमर युवा क्रांतिकारियों ने | चिनगारी को हवा का समर्थन मिला तो वह विकारल अग्नि का स्वरूप लेकर पूरे देश में फैल गयी | आजाद , भगतसिंह , महारानी लक्ष्मीबाई , मंगल पांडे , सुखदेव व अनेक अमर शहीद दिव्यात्मा जिन सबका नाम भी इतिहास में नहीं है आदि महापुरुषों ने इस संग्राम में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाते हुए अपना आत्म बलिदान करके स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया | ऐसे में देश महान आत्मा सुभाष चन्द्र बोश को कैसे भूल सकता है जिनकी “आजाद हिन्द फोज” ने इस महासंग्राम में अपना सब कुछ लुटा दिया | अनेक बलिदानियों के संयुक्त प्रयास से अंग्रेज हमारा देश छोड़ने को विवश हो गये और 15 अगस्त सन् 1947 को हमारा देश स्वतंत्र हो गया | 15अगस्त सन्की1947 सुबह आसमान से सूरज भारतीयों के लिए एक नया जीवन लेकर प्रकट हुआ और लोगों ने लम्बे समय के बाद बहुत कुछ गंवा करके खुली हवा में सांस ली |

आज हम अंग्रेजों की दासता से तो स्वतंत्र हो गये हैं परंतु यह स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भी चारों ओर पराधीनता ही दिखाई पड॒ती है | अंग्रेजों के चले जाने के बाद भी क्या हम आजाद हुए ?? संविधान की दृष्टि से देखा जाय तब तो हम आजाद कहे जा सकते हैं परंतु समाजिक , मानसिक एवं राजनीतिक रूप से हम आज भी गुलाम ही हैं | आज भी हमारे सर्वोच्च सदन में गुलामी की प्रतीक अंग्रेजी भाषा में ही कानून पारित किये जाते हैं |आज भारत अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा, नक्सलवाद, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा जैसी समस्याओं से लड़ रहा है। भारत को जब तक इस समस्याओं से बाहर नहीं निकालते तब तक स्वतंत्रता सेनानियों का सपना पूरा नहीं होगा। एक होकर प्रयास करने से श्रेष्ठ और विकसित भारत का निर्माण होगा। 

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